Youth Red Cross

यूथ रैडक्रास
डॉ0 षषि मंगला
उपबोधिका- यूथ रैडक्रास

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः
सर्वे भद्राणि पष्यन्तु मा कष्चित् दुख भाग भवेत्।

अर्थात् सब सुखी हो, सब निरोग हो, सबका कल्याण हो, किसी को दुख प्राप्त न हो। रैडक्रास भी इसी भाव से ओत प्रोत एक संस्था है। अन्तर्राश्ट्रीय स्तर पर इसका प्रादुर्भाव सर जीन हेनरी ड्यूनो द्वारा सन् 1863 में इटली के कस्बे सेलफरीनों मंे युद्ध के दौरान घायल हुए लोगों की सेवा के प्रबल विचार से हुआ। भारत में इसका विकास सन् 1925 में हुआ तथा जून 1971 में हरियाणा रैडक्रास षाखा बनी। स्वास्थ्य एवम् स्वच्छता, प्राथमिक चिकित्सा, राश्ट्रीय अखण्डता, प्राकृतिक आपदाओं का सामना, स्वैच्छिक नेत्रदान, रक्तदान, सामाजिक बुराईयों के निवारण एवम् आम नागरिकों की सहायता करना इस संस्था का मुख्य उद्वेष्य है।
महाविद्यालय में रैडक्रास इकाई का षुभारम्भ डॉ0 ए0के0 गर्ग (रसायन विभाग) द्वारा 2011 में हुआ। वर्तमान समय में महाविद्यालयी यूथ रैडक्रास उपबोधिका डॉ0 षषि मंगला हैं तथा राजनीति षास्त्र विभाग के प्रोफेसर डॉ0 राजबीर सिंह सदस्य हैं।
यूथ रैडक्रास मंे विद्यार्थियों का पंजीकरण
1. सत्र 2011-12 में 80 विद्यार्थियों ने नामांकन दर्ज कराया।
2. सत्र 2012-13 में 95 विद्यार्थियों ने नामांकन दर्ज कराया।
3. सत्र 2013-14 में 70 विद्यार्थियों ने नामांकन दर्ज कराया।
4. सत्र 2014-15 में 100 विद्यार्थियों ने नामांकन दर्ज कराया।
5. सत्र 2015-16 में 81 विद्यार्थियों ने नामांकन दर्ज कराया।
6. सत्र 2016-17 में 101 विद्यार्थियों ने नामांकन दर्ज कराया।
गतिविधियॉं
1. महाविद्यालय में प्रत्येक वर्श यूथ रैडक्रास इकाई के अन्तर्गत कॉलेज संस्थापक श्री परमानन्द कालड़ा की पुण्यतिथि पर विषाल रक्तदान षिविर का आयोजन किया जाता है। जिसमें प्रत्येक वर्श लगभग 100 यूनिट से ऊपर रक्त एकत्रित किया जाता है।
2. सामाजिक बुराईयों जैसे नषा मुक्ति, कन्या भ्रूण-हत्या, पर्यावरण सुरक्षा, रक्तदान, सड़क सुरक्षा, स्वच्छ भारत अभियान आदि पर लोगों को जागरुक करने के लिए विभिन्न रैलियां निकाली जाती है।
3. राश्ट्रीय पल्स पोलियो प्रतिरक्षण अभियान में समाजसेवी घर घर जाकर सेवा भाव से पल्स पोलियो की बूंदे बच्चों को पिलाते है।
4. प्राथमिक चिकित्सा षिविर में विद्यार्थियों को नेत्रदान, रक्तदान, प्राथमिक चिकित्सा विभिन्न प्रकार की पटट्यिों का बांधना, सांप तथा जहरीले कीड़ों के काटने पर प्राथमिक चिकित्सा से अवगत कराया जाता है तथा भाशण व कविता प्रतियोगिता भी कराई जाती है।
5. यूथ रैडक्रास विष्वविद्यालय स्तर पर सात दिवसीय बाह्य राज्य स्वास्थ्य जागरुकता प्रषिक्षण षिविर के लिए प्रत्येक वर्श दो छात्रों व दो छात्राओं का चयन होता है और विद्यार्थी षिविर में अपनी प्रतिभागिता से ज्ञानवर्धन कर महाविद्यालय में अन्य विद्यार्थियों को रक्तदान, नेत्रदान तथा अन्य क्रिया-कलापों के लिए प्रेरित करते है।
समय के साथ-साथ आज समाज में जागरुकता बढ़ती जा रही है तथा रैडक्रास के प्रति युवाओं का रुझान बढ़ रहा है। आज छात्राएं भी रक्तदान एवं अन्य गतिविधियों में छात्रों से पीछे नहीं हैं।